मानव का उत्थान
मानव के पतन के मुख्य कारण है -
A. पाश्चात्य संस्कृति को अपनाना
B. अश्लील धारावाहिक और फिल्मों के कारण
C. स्कूल में आध्यात्मिक शिक्षा ना होने के कारण
D. शास्त्रों के अनुसार सतभक्ति विधि ना अपनाने के कारण
आजकल स्कूलों में जो पढाया जा रहा है उससे पाश्चात्य संस्कृति की ओर ज्यादा रुझान बढ़ रहा है जिससे छोटे कपड़े पहनना शुरू कर दिया
स्कूल में जो सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नाम पर अश्लील गाना व नाचना करवाए जा रहे हैं
जिसके कारण बहन बेटियों का आदर नहीं कर रहे हैं और इतनी अश्लीलता फैल गई है
जिसका दुष्प्रभाव -
आए दिन बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही है इस तरह इंसान पतन की ओर जा रहा है
फिल्मों में दिखाई जा रहे नशे की प्रवृत्ति से लड़के, लड़कियां सभी प्रकार का नशा करना सीख रहे हैं जिससे चोरी डकैती छल कपट भ्रष्टाचार आदि नतीजे है
शास्त्र विधि विरुद्ध साधना पतन का कारण-
पवित्र गीता अध्याय 9 के श्लोक 23, 24 में कहा है कि जो व्यक्ति अन्य देवताओं को पूजते हैं वह भी मेरी (काल जाल में रहने वाली) पूजा ही कर रहे हैं । परंतु उनकी यह पूजा अविधिपूर्वक है (अर्थात शास्त्र विरुद्ध है भावार्थ है कि अन्य देवताओं को नहीं पूछना चाहिए)। क्योंकि संपूर्ण यज्ञों का भोक्ता व स्वामी मैं ही हूं। वे भक्त मुझे अच्छी तरह नहीं जानते। इसीलिए पतन को प्राप्त होते हैं।नरक व 84 लाख जूनियों का कष्ट। जैसे गीता अध्याय 3 श्लोक 14, 15 में कहा है कि सर्व यज्ञों की प्रतिष्ठित अर्थात सम्मानित, जिसको यज्ञ समर्पण की जाती है वह परमात्मा (सर्व गतम् ब्रह्म) पूर्णब्रह्म है। वह कर्माधार बनाकर सर्व प्राणियों को प्रदान करता है।परंतु पूर्ण संत ना मिलने तक सर्व यज्ञों का भोग (आनन्द) काल (मन रूप में) ही भोगता है, इसीलिए कह रहा है कि मैं सर्व यज्ञों का भोक्ता व स्वामी हूं।
इससे सिद्ध हुआ कि शास्त्र विरुद्ध भक्ति पतन का मुख्य कारण है
पूर्णब्रह्म की भत्ती के लिए पवित्र गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में पवित्र गीता बोलने वाला (ब्रह्म) प्रभु स्वयं कह रहा है कि पूर्ण परमात्मा की भक्ति व प्राप्ति के लिए किसी तत्वज्ञानी संत को ढूंढ ले और फिर जैसे वह विधि बताएं वैसे कर।
पवित्र गीता जी को बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि पूर्ण परमात्मा का पूर्ण ज्ञान व भक्ति विधि मैं नहीं जानता अपनी साधना के बारे में गीता अध्याय 8 के श्लोक 13 में कहा है कि मेरी भक्ति का तो केवल एक 'ओम्' अक्षर है जिसका उच्चारण करके अंतिम श्वास तक जाप करने से मेरी वाली परम गति को प्राप्त होगा। फिर गीता अध्याय 7 श्लोक 18 में कहां है कि जिन प्रभु चाहने वाली आत्माओं को तत्वदर्शी संत नहीं मिला है इसीलिए उदार आत्माएं मेरी वाली (अनुत्तमाम) अति अनुत्तम परमगति में ही आश्रित हैं।
(पवित्र गीता जी बोलने वाला प्रभु स्वयं कह रहा है मेरी साधना से होने वाली गति अर्थात मुक्ति भी अति श्रेष्ठ है)
पवित्र गीता जी अध्याय नंबर 15 श्लोक नंबर 1 से 4 तथा श्लोक नंबर 16 व 17 का आशय
कबीर- अक्षर पुरुष एक पेड़ है,
निरंजन वाकी डार।
तीनों देवा शाखा हैं,
पात रूप संसार।।
इस संसार रूपी पेड़ को जड़ से पत्तों सहित बताने वाले जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी ने ही बताया है और शास्त्रों के अनुसार सतभक्ति विधि प्रदान कर रहे है जिससे मानव उत्थान होगा।
मानव का उत्थान संभव है
संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा लिखी पुस्तक "जीने की राह'
जीने की राह पुस्तक को देश के स्कूलों कॉलेजों में एक विषय (Subject) लगाया जाए तो समाज में फैली सभी बुराई समाप्त हो सकती है।
स्वदेशी संस्कृति पुनः जीवित होकर देश की जनता सुख से जीवन जिए गी देश की जनता परमात्मा से डरने वाली शुभ कर्म करने वाली बन जाएगी
यौन अपराध, नशाखोरी, जुआ, चोरी, दहेज प्रथा, घर में होने वाले झगड़े जड़ से नष्ट होकर आपसी भाईचारा बढेगा एक दूसरे के दुख में साथ देना, परमात्मा की चर्चाकरना, शिष्टाचार से व्यवहार करना मानव समाज की परंपरा बन जाएगी।
माता पिता के प्रति बच्चों का बिगड़ा स्वभाव समाप्त होकर उनकी सेवा करने का मन बनेगा चरित्र निर्माण होगा।
जीने की राह पुस्तक घर-घर में रखने योग्य है इसे पढ़ने से लोक तथा परलोक दोनों सुखी और सकते हैं।
संत रामपाल जी महाराज जी के शिष्य परमार्थ के कार्य में हमेशा तत्पर रहते हैं
✅ रक्तदान करना coronavirus
lockdown की स्थिति से जूझ रहे देश में संत रामपाल जी महाराज के अनुयाई जगह-जगह हॉस्पिटलों में जाकर रक्तदान कर रहे हैं
✅ संत रामपाल जी महाराज जी के शिष्य किसी प्रकार का नशा ना तो करते हैं ना हिला कर देते।
✅ बगैर दहेज के शादी करना व करवा रहे हैं
कोरोना वायरस की महामारी से पूरा देश जूझ रहा है ऐसी स्थिति में संत रामपाल जी महाराज जी के शिष्य घर-घर सुखा राशन पहुंचाने की व्यवस्था कर रहे हैं
संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेने वालों के सभी प्रकार के नशे छूट जाते हैं
संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेने वालों के कैंसर जैसी बीमारियों से भी निजात मिल रही है
अगर आप पूर्ण गुरु की तलाश में है ,
पूर्ण परमात्मा की तलाश में है,
मोक्ष पाना चाहते हो,
जन्म मरण से पूर्ण रूप से छुटकारा चाहते
है तो निचे दिए गए फॉर्म को भरे और
निःशुल्क नामदान प्राप्त करे
👇👇
http://bit.ly/NamDiksha
मानव के पतन के मुख्य कारण है -
A. पाश्चात्य संस्कृति को अपनाना
B. अश्लील धारावाहिक और फिल्मों के कारण
C. स्कूल में आध्यात्मिक शिक्षा ना होने के कारण
D. शास्त्रों के अनुसार सतभक्ति विधि ना अपनाने के कारण
आजकल स्कूलों में जो पढाया जा रहा है उससे पाश्चात्य संस्कृति की ओर ज्यादा रुझान बढ़ रहा है जिससे छोटे कपड़े पहनना शुरू कर दिया
स्कूल में जो सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नाम पर अश्लील गाना व नाचना करवाए जा रहे हैं
जिसके कारण बहन बेटियों का आदर नहीं कर रहे हैं और इतनी अश्लीलता फैल गई है
जिसका दुष्प्रभाव -
आए दिन बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही है इस तरह इंसान पतन की ओर जा रहा है
फिल्मों में दिखाई जा रहे नशे की प्रवृत्ति से लड़के, लड़कियां सभी प्रकार का नशा करना सीख रहे हैं जिससे चोरी डकैती छल कपट भ्रष्टाचार आदि नतीजे है
शास्त्र विधि विरुद्ध साधना पतन का कारण-
पवित्र गीता अध्याय 9 के श्लोक 23, 24 में कहा है कि जो व्यक्ति अन्य देवताओं को पूजते हैं वह भी मेरी (काल जाल में रहने वाली) पूजा ही कर रहे हैं । परंतु उनकी यह पूजा अविधिपूर्वक है (अर्थात शास्त्र विरुद्ध है भावार्थ है कि अन्य देवताओं को नहीं पूछना चाहिए)। क्योंकि संपूर्ण यज्ञों का भोक्ता व स्वामी मैं ही हूं। वे भक्त मुझे अच्छी तरह नहीं जानते। इसीलिए पतन को प्राप्त होते हैं।नरक व 84 लाख जूनियों का कष्ट। जैसे गीता अध्याय 3 श्लोक 14, 15 में कहा है कि सर्व यज्ञों की प्रतिष्ठित अर्थात सम्मानित, जिसको यज्ञ समर्पण की जाती है वह परमात्मा (सर्व गतम् ब्रह्म) पूर्णब्रह्म है। वह कर्माधार बनाकर सर्व प्राणियों को प्रदान करता है।परंतु पूर्ण संत ना मिलने तक सर्व यज्ञों का भोग (आनन्द) काल (मन रूप में) ही भोगता है, इसीलिए कह रहा है कि मैं सर्व यज्ञों का भोक्ता व स्वामी हूं।
इससे सिद्ध हुआ कि शास्त्र विरुद्ध भक्ति पतन का मुख्य कारण है
पूर्णब्रह्म की भत्ती के लिए पवित्र गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में पवित्र गीता बोलने वाला (ब्रह्म) प्रभु स्वयं कह रहा है कि पूर्ण परमात्मा की भक्ति व प्राप्ति के लिए किसी तत्वज्ञानी संत को ढूंढ ले और फिर जैसे वह विधि बताएं वैसे कर।
पवित्र गीता जी को बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि पूर्ण परमात्मा का पूर्ण ज्ञान व भक्ति विधि मैं नहीं जानता अपनी साधना के बारे में गीता अध्याय 8 के श्लोक 13 में कहा है कि मेरी भक्ति का तो केवल एक 'ओम्' अक्षर है जिसका उच्चारण करके अंतिम श्वास तक जाप करने से मेरी वाली परम गति को प्राप्त होगा। फिर गीता अध्याय 7 श्लोक 18 में कहां है कि जिन प्रभु चाहने वाली आत्माओं को तत्वदर्शी संत नहीं मिला है इसीलिए उदार आत्माएं मेरी वाली (अनुत्तमाम) अति अनुत्तम परमगति में ही आश्रित हैं।
(पवित्र गीता जी बोलने वाला प्रभु स्वयं कह रहा है मेरी साधना से होने वाली गति अर्थात मुक्ति भी अति श्रेष्ठ है)
पवित्र गीता जी अध्याय नंबर 15 श्लोक नंबर 1 से 4 तथा श्लोक नंबर 16 व 17 का आशय
कबीर- अक्षर पुरुष एक पेड़ है,
निरंजन वाकी डार।
तीनों देवा शाखा हैं,
पात रूप संसार।।
इस संसार रूपी पेड़ को जड़ से पत्तों सहित बताने वाले जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी ने ही बताया है और शास्त्रों के अनुसार सतभक्ति विधि प्रदान कर रहे है जिससे मानव उत्थान होगा।
मानव का उत्थान संभव है
संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा लिखी पुस्तक "जीने की राह'
जीने की राह पुस्तक को देश के स्कूलों कॉलेजों में एक विषय (Subject) लगाया जाए तो समाज में फैली सभी बुराई समाप्त हो सकती है।
स्वदेशी संस्कृति पुनः जीवित होकर देश की जनता सुख से जीवन जिए गी देश की जनता परमात्मा से डरने वाली शुभ कर्म करने वाली बन जाएगी
यौन अपराध, नशाखोरी, जुआ, चोरी, दहेज प्रथा, घर में होने वाले झगड़े जड़ से नष्ट होकर आपसी भाईचारा बढेगा एक दूसरे के दुख में साथ देना, परमात्मा की चर्चाकरना, शिष्टाचार से व्यवहार करना मानव समाज की परंपरा बन जाएगी।
माता पिता के प्रति बच्चों का बिगड़ा स्वभाव समाप्त होकर उनकी सेवा करने का मन बनेगा चरित्र निर्माण होगा।
जीने की राह पुस्तक घर-घर में रखने योग्य है इसे पढ़ने से लोक तथा परलोक दोनों सुखी और सकते हैं।
संत रामपाल जी महाराज जी के शिष्य परमार्थ के कार्य में हमेशा तत्पर रहते हैं
✅ रक्तदान करना coronavirus
lockdown की स्थिति से जूझ रहे देश में संत रामपाल जी महाराज के अनुयाई जगह-जगह हॉस्पिटलों में जाकर रक्तदान कर रहे हैं
✅ संत रामपाल जी महाराज जी के शिष्य किसी प्रकार का नशा ना तो करते हैं ना हिला कर देते।
✅ बगैर दहेज के शादी करना व करवा रहे हैं
कोरोना वायरस की महामारी से पूरा देश जूझ रहा है ऐसी स्थिति में संत रामपाल जी महाराज जी के शिष्य घर-घर सुखा राशन पहुंचाने की व्यवस्था कर रहे हैं
संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेने वालों के कैंसर जैसी बीमारियों से भी निजात मिल रही है
अगर आप पूर्ण गुरु की तलाश में है ,
पूर्ण परमात्मा की तलाश में है,
मोक्ष पाना चाहते हो,
जन्म मरण से पूर्ण रूप से छुटकारा चाहते
है तो निचे दिए गए फॉर्म को भरे और
निःशुल्क नामदान प्राप्त करे
👇👇
http://bit.ly/NamDiksha












Comments
Post a Comment